Saturday, 30 April 2016

भारत बचाओ ------ विभूति नारायण राय Ex IPS



Arvind Raj Swarup Cpi
29-04-16   · 
श्री विभूति नारायण राय Ex IPSकी पोस्ट:
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आज मोदी सरकार का 700वां दिन है

जब मोदी सरकार ने शपथ ली थी......

तब रेल किराया अमृतसर से जालंधर का 45 रूपये था
आज बढोतरी के बाद 78 रूपये है !

प्लेटफार्म टिकट 3 रूपये था और आज 10 रूपये है।

98 रूपये मे 2G नेट पैक अनलिमिटेड आता था आज
2G 246 रूपये मे आता है अनलिमिटेड तब काल रेट
30 पैसे मिनट था आज 1 रूपये मिनट ।

तब कच्चा तेल 119 डॉलर बैरल था और पैट्रोल दिल्ली में 67 रूपये लीटर था आज कच्चा तेल 30 डॉलर बैरल है और पैट्रोल 60 रूपये लीटर दिल्ली मे और पंजाब मे 68.32 पैसे लीटर।

दाल तुवर की 70 रूपये थी और आज 150

सर्विस टैक्स 12.36% था आज 14.5% है

एक्साइज ड्यूटी 10% थी आज 12.36% है और

सभी उधोगपति दोस्त बैलेंस शीट चैक कर लें साथ ही चार्टड अकाउंटेंट साहब अपने ग्राहकों और ग्राहक स्वंय बैलेंस शीट जेब देख ले सारा माजरा समझ आ जाएगा। अच्छे दिन !

डॉलर का रेट 58.50 था आज 68.50

आज मोदी सरकार का 700वां दिन है।

ये वो सरकार है जो आपसे 100 करोड रुपये की गैस सब्सिडी खत्म करवाने के लिए 250 करोड के विज्ञापन दे चुकी है । आज विशव में कच्चे तेल एवं गैस के भाव के मधेनज़र गैस का भाव वैसे भी ₹400 होना चाहिए

स्वच्छता अभियान का विज्ञापन भी 250 करोड का था लेकिन दिल्ली के सफाई कर्मियों की तनख्वाह के लिए जरूरी 35 करोड इनके पास नहीं है ।

किसान "टीवी" पर सालाना 100 करोड का खर्चा दे सकते हैं क्योंकि इस चैनल के सलाहकार समेत आधे कर्मचारी आर एस एस के किसी अनुशागिक संगठन से है......... मगर किसानों की खुद सब्सिडी छीन ली।

इनके पास योगा डे के लिए 500 करोड है, रामदेव के पतंजलि को हरियाणा स्कूलो मे योगा सिखाने के लिए सालाना 700 करोड है...
मगर इन्होनें प्राथमिक शिक्षा के बजट में 20% की कटौती की
स्कूलो के लिए इनके पास पैसे नहीं हैं।

इस सरकार के पास कॉरपोरेट को 64000 करोड है टैक्स छूट देने के लिए मगर आत्महत्या कर रहे, किसानों का करजा चुकाने को 15000 करोड नहीं है ।

स्किल इंडिया के लिए 200 करोड का विज्ञापन बजट है मगर युवाओं की छात्रवृति मे 500 करोड की कटौती कर दी है।

सरकार घाटे में हैं, रेलवे की जमीनें बेचने का टेंडर पास कर दिया है । मगर अडानी के लिए 22000 करोड देने को है ।

भारत की जनता यह सरकस देख रही है ।

भारत बचाओ आंदोलन

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https://www.facebook.com/arvindrajswarup.cpi/posts/1741734662711331

Friday, 29 April 2016

" जे एन यू के सौरभ शर्मा के नाम एक टीचर का खुला खत " ------ बोलता हिंदुस्तान / दखल की दुनिया








BH firstpost
“मेरी बेटी ABVP से भी जुड़ सकती थी, लेकिन अब नहीं जुड़ेगी।”

April 27, 2016bh
(ये ख़त 19 मार्च को लिखा गया है। लेखिका ने अभी भेजा तो देर से छाप रहा हूं- मॉडरेटर )

प्रिय सौरभ शर्मा,



मैं बहुत दिनों से तुमसे बात करने की सोच रही थी। परसों जब मैं JNU में अपनी बेटी से मिलने गई थी तो तुम मुझे दिखे भी थे। अनुपम खेर के लिए इंतजाम करने में मशगूल। सोचा भी कि तुमसे मिलकर आऊं, लेकिन तभी उमर और अनिर्बान की ज़मानत की ख़बर आई और देखते ही देखते एडमिन ब्लॉक पर लगने वाले नारों में मैंने ख़ुद को बह जाने दिया। उस खुशी का हिस्सा बन गई, जिसमें हमारी अगली पीढ़ी महफूज़ रहती है। पिछले कई दिनों (11 फरवरी ) से मैं ठीक से सो नहीं पाई थी। चिंता, परेशानी, डर, घृणा, अफ़सोस के साथ हतप्रभ थी। मैंने सोचा नहीं था मैं अपने जीवन में यह दिन देखूंगी। इमरजेंसी के समय मैं बहुत छोटी थी, कुछ भी याद नहीं है। बस सुना ही है उसके बारे में। लेकिन यह जो गुज़री हम सब पर यह भी कम ख़ौफ़नाक नहीं था। युद्ध जब युद्ध के नाम पर हो तब अपना पक्ष तय करना आसान होता है पर जब युद्ध प्रेम, संस्कृति, आस्था, शिक्षा, देश और विकास के नाम पर हो तो लड़ने के लिए बहुत ताक़त लगानी पड़ती है। सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन इस लड़ाई की शुरुआत तुमने कर दी है। हालांकि मैं यह मानती हूँ कि तुम सिर्फ एक मोहरा हो और तुम्हारा इस्तेमाल किया गया है। जिन्होंने यह किया है उनका इतिहास दाग़दार है, हम सब यह जानते हैं। नमो गंगे से नमो दंगे तक की सारी प्रक्रिया से हम सब, पूरा देश वाकिफ़ है।

दूसरी तरफ मैं यह भी मानती हूं कि तुम्हारा विश्वविद्यालय भी अल्टीमेट नहीं है वहाँ भी ज़रूर कुछ कमियां, कुछ ज्यादतियां और परेशानियां होंगी। इसका साफ प्रमाण है कि तुम वहां से चुनाव जीते और तुम्हारे विश्वविद्यालय ने तुम्हें JNU में काम करने का एक बेहतरीन मौका दिया लेकिन अफ़सोस तुमने यह बड़ा मौका गवां दिया और उस जमात में जा शामिल हुए जो बहुत दिनों से रंगे सियार की तरह तुम्हारे विश्वविद्यालय पर नज़रें गड़ाए हुए थे। JNU की सारी कमियों के बावजूद तुम्हें भी यह मानने में परहेज़ नहीं होगा कि JNU हमेशा से सत्ता विरोधी रहा है। नंदीग्राम से लेकर पता नहीं कितने मुद्दों पर हर वक़्त बहस करने को भी तैयार रहता है। वैचारिक विरोध का मतलब वहां दुश्मनी तो कतई नहीं है। सौरभ मैं तुम्हें बताऊं मेरी बेटी तीन साल से वहाँ पढ़ रही है। मैं और उसके बाबा दोनों ही वहाँ पढ़ना चाहते थे पर पढ़ नहीं सके। जिसका अफ़सोस थोड़ा कम हुआ जब हमारी बेटी ने वहां का एंट्रेंस क्लियर किया। हमने उसे शुरू से ही तार्किक और वैज्ञानिक सोच रखने वाला इंसान बनाने की कोशिश की है और उसका व्यक्तित्व स्वतंत्र हो, किसी की छाया नहीं, दूसरों की बात सुनने-समझने का माद्दा हो। गलत चीज पर उसे बहुत गुस्सा आए। झूठ-फरेब से नफरत करे। ऐसी कोशिश हमारी रही है। (कितनी पूरी हो पाई नहीं जानती, क्योंकि सीखने का कोई अंतिम दिन नहीं होता)। कुल मिलाकर मोटे तौर पर तुम यह कह सकते हो कि कुछ वामपंथियों जैसी विचारधारा वाला घर उसे मिला।

JNU, जिसे वामपंथियों का गढ़ कहा जाता है बड़ा ही स्वाभाविक था कि वह जाते ही किसी वामपंथी स्टूडेन्ट यूनियन से जुड़ जाती, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और किसी वाम धड़े ने उसे बाध्य भी नहीं किया। उसने तय किया कि अभी वो सबको, सबके काम को देखेगी फिर सोचेगी कि किसके साथ जुड़ना है, हो सकता था कि तुमसे जुड़ती। ‘था’ इसलिए लिख रही हूं कि अब ऐसा कभी नहीं होगा। तार्किक, समझदार और ईमानदार लोगों के लिए तुमने अपने रास्ते बंद कर लिए हैं।



मैं ये पत्र इसलिए लिख रही हूं कि मैं तुम्हारी, तुम जैसे युवा की पूरी बनावट समझना चाहती हूं। मैं आज तक नहीं समझ पाई कि एक युवा दिमाग जो सबसे ज्यादा सवाल पूछता है, असहमतियां दर्ज करता है। लड़ता है, जूझ़ता है, ग़लत चीजों से सीधे जाकर भिड़ जाता है। कैसे, किसके प्रभाव से षड़यंत्र करने लगा, साम्प्रदायिक हो गया और सबसे बड़ी बात कि वर्ग शत्रु बन गया। दिल पर हाथ रख कर कहो सौरभ जब तुम्हारे साथियों (विरोधी ही सही) को पुलिस घसीट कर ले जा रही थी। तुम्हारे दिल की धड़कने बढ़ नहीं गई थीं? आंखें भर नहीं आईं थी? जब कन्हैया को बेरहमी से मारा जा रहा था। असहाय होने की पीड़ा से तुम गुस्से से छटपटा नहीं रहे थे? जब उमर सिर्फ एक मुसलमान में बदल दिया गया और ‘मास्टर माइंड’ जैसी गालियों से मर रहा था। तुम्हारा दिमाग क्या शांत रह पाया था? वहाँ कोई हलचल नहीं हुई? रामा नागा, अनंत, अनिर्बान, आशुतोष तुम्हारे ही जैसे हाड़-मांस के स्टूडेन्ट जब ‘देशद्रोही’ में बदल दिए गए। तुम्हे अपने आकाओं से घृणा नहीं हुई? रामा तो शायद तुमसे भी ज्यादा ग़रीब परिवार का लड़का है। चलो इन सबको छोड़ो, शायद इन नामों से तुम्हे गुस्सा आता हो, कि ये सब तुम्हारे विरोधी हैं। लेकिन तुम्हें रोहित वेमुला से भी कोई लेना-देना नहीं है? टी.वी. पर जब तुमने कहा कि खेतों में पानी देकर तुमने पढ़ाई की है तो मुझे सुनकर अच्छा लगा, आज तुम अपनी मेहनत से JNU में हो यह जानकर और अच्छा लगा। लेकिन इसी तरह से रोहित के पढ़ने से तुम्हें खुशी क्यूं नहीं होती? उसकी मेहनत और तुम्हारी मेहनत में क्या फर्क रह जाता है? ऐसा क्या गुज़रता है कि रोहित की संस्थागत हत्या होती है और तुम एक लोकतांत्रिक संस्था की हत्या के अगुआ या चेहरा बन जाते हो? अपराध तुमसे हुआ है सौरभ लेकिन तुम स्टूडेन्ट हो इसलिए हम हमेशा इसे एक गलती कह कर सम्बोधित करेंगे क्योंकि अपराध की सज़ा होती है और गलतियां सुधारी जाती हैं। अपराधी से घृणा होती है और गलती करने वाले को सुबह का भूला कह कर सब कुछ भूल जाने का मन करता है।




हो सकता है अभी कुछ लोग तुमसे नफरत कर बैठे हों पर एक टीचर होने के नाते मैं तुमसे नफरत नहीं कर सकती। हां तुमसे नाराज़ हूं और बेहद नाराज़ हूं। हो सकता है तुम भी अपनी संस्था से नाराज़ हो और अलग पार्टी, अलग विचारधारा को अपना कर तुम अपनी नाराज़गी जता ही रहे थे फिर ऐसा क्या हुआ कि नाराज़ होते-होते तुम व्यक्तियों (कन्हैया, उमर, बान, अनंत, आशुतोष, शेहला, रामा आदि) से नफरत करने लगे। इतनी नफरत कि चुपके से तुमने ज़ी न्यूज़ को अपनी संस्था में सेंध लगाने के लिए बुला लिया। बहुत कुछ गुज़र गया सौरभ और जो कुछ घट चुका उसे लौटाया नहीं जा सकता-रोहित वेमुला को नहीं लौटाया जा सकता, कन्हैया, उमर और बान के जेल में बिताए दिन नहीं लौटाए जा सकते, कन्हैया की पिटाई का अपमान नहीं लौटाया जा सकता, उनके परिवारों पर जो गुज़री वो नहीं लौटाया जा सकता, तुम्हारे लोगों द्वारा दी गई भद्दी गालियों का दंश नहीं लौटाया जा सकता लेकिन फिर भी एक चीज़ है जो लौटाई जा सकती है और वो है तुम्हारी समझ और तुम्हारी मरी हुई आत्मा।

अगर ये लौट आए तो JNU  के बेलौस बेफिक्र दिन और रात लौट आएंगे। इस देश के दिलों में पड़ी दरार भर जायेगी। बसंत का मौसम लौट आएगा। राधिका वेमुला के होठों की मुस्कान लौट आयेगी। संघ अपने दड़बे में लौट जायेगा और एमएचआरडी के फरमान लौट जायेंगे। सौरभ तुम्हें लौटना इसलिए भी चाहिए कि जिस तरफ तुम खड़े हो उधर नफरत, घृणा, हिंसा, झूठ, कायरता, साम्प्रदायिकता और फासिज़्म है जिसे अंत में खुद की कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या करनी पड़ती है। और एक टीचर होने के नाते मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तुम्हारा नाम इतिहास में एक धोखेबाज़ और विभीषण के तौर पर दर्ज़ हो क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो जब मेरी बेटी की बेटी JNU में पढ़ने जायेगी तो उसके सीनियर भी उसे सुनायेंगे ये कथा कि एक समय में यहाँ एक सौरभ शर्मा हुआ करता था……………।

नोट: मेरा एक सुझाव है कि रबीन्द्र नाथ टैगौर का उपन्यास “गोरा” पढ़ लेना। शायद तुम्हें वापस लौटने में मदद मिले।

साभार- दख़ल की दुनिया (ब्लॉग)


http://boltahindustan.com/a-open-letter-to-saurabh-sharma-from-a-teacher/

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29-04-2016 


Thursday, 28 April 2016

जे एन यू की दंडात्मक कारवाई के विरुद्ध भूख हड़ताल ------ कन्हैया कुमार



नई दिल्‍ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दंडात्मक कार्रवाई को निष्प्रभावी करने की मांग करते हुए विश्वविद्यालय के छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। नौ फरवरी की विवादास्पद घटना को लेकर जेएनयू ने कुछ छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई की है।

जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों के साथ बुधवार रात से भूख हड़ताल शुरू की और कहा कि उन लोगों ने मामले की जांच करने वाली उच्च स्तरीय जांच समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों को खारिज कर दिया है।
कन्हैया, उमर और अनिर्बान भट्टाचार्य को फरवरी में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के विरोध में कैंपस में कार्यक्रम आयोजित करने पर देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी नारे लगे थे। सभी आरोपी अभी जमानत पर बाहर है।



कन्हैया नहीं है राष्ट्र विरोधी :ब्राह्मण वाद को राष्ट्रवाद कहा जा रहा है


कन्हैया कुमार पर हुआ था हमला
पुणे। जेएनयू के छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने एक बार फिर मोदी सरकार पर आरोप लगाए हैं। कन्हैया ने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश को सांप्रदायिकता और दलित विरोधी नीतियों की प्रयोगशाला में बदल कर रख दिया है। उसने मोदी सरकार के पीछे की ताकत आरएसएस को बताया। उसने कहा कि मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के पीछे आरएसएस की ताकत है।

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स असोसिएशन के बैनर तले इकट्ठा हुए छात्रों की एक सभा को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि मोदी प्रधानमंत्री हैं और आरएसएस उनकी ताकत है। उन्होंने देश को सांप्रदायिकता और दलित विरोधी नीतियों की प्रयोगशाला में बदल कर रख दिया है। कन्हैया ने आगे कहा ‘सामाजिक बराबरी और जातिवाद को खत्म करने की बात करने वाली हमारी विचारधारा के बारे में जब हम बात करते हैं तो आप डरते क्यों हैं? जेट एयरवेज के विमान में खुद पर हुए कथित हमले के बाद भारी पुलिस सुरक्षा में यहां पहुंचे कन्हैया ने जोर देकर कहा कि वह ऐसे हमलों से डरने वाले नहीं हैं।


कन्हैया पर प्लेन में हुआ था हमला
कन्हैया कुमार पर विमान में हमला किया गया था। खबरों की मानें तो मुंबई एयरपोर्ट पर विमान में बैठे एक शख्स ने कन्हैया का गला दबाने की कोशिश की। ये घटना विमान के उड़ान भरने से पहले हुई थी। कन्हैया ने इस बात की जानकारी खुद ट्वीट करके दी थी। कन्हैया कुमार मुंबई से पुणे जा रहे थे जिस वक्त ये घटना हुई।

शिवसेना ने कहा, कन्हैया नहीं है राष्ट्र विरोधी


शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि सरकार द्वारा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ‘राष्ट्र विरोधी’ के रूप में पेश करना गलत है। यहां पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में उद्धव ठाकरे ने कहा कि पहली बात तो यह कि कन्हैया कुमार को किसने पैदा (चर्चित) किया? सरकार को इस बारे में विचार करना चाहिए। उन्हें राष्ट्र विरोधी बताना गलत है। उन्होंने चेताया कि अगर युवाओं को इसी तरह राष्ट्र विरोधी करार दिया जाएगा तो वे देश के लिए खुलकर काम नहीं कर सकेंगे और भारतीय जनता पार्टी युवाओं के समर्थन से हाथ धो बैठेगी।

https://puridunia.com/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B/104661
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पुणे, 25 अप्रैल (एजेंसी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को नरेंद्र मोदी सरकार के पीछे की ताकत करार देते हुए जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने देश को सांप्रदायिकता और दलित विरोधी नीतियों की प्रयोगशाला में बदल कर रख दिया है। प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स असोसिएशन के बैनर तले इकट्ठा हुए छात्रों की एक सभा को रविवार को संबोधित करते हुए कन्हैया ने कहा, मोदी प्रधानमंत्री हैं और आरएसएस उनकी ताकत है। उन्होंने देश को सांप्रदायिकता और दलित विरोधी नीतियों की प्रयोगशाला में बदल कर रख दिया है। 
सामाजिक बराबरी और जातिवाद को खत्म करने की बात करने वाली हमारी विचारधारा के बारे में जब हम बात करते हैं तो आप डरते क्यों हैं? जेट एयरवेज के विमान में खुद पर हुए कथित हमले के बाद भारी पुलिस सुरक्षा में यहां पहुंचे कन्हैया ने जोर देकर कहा कि वह ऐसे हमलों से डरने वाले नहीं हैं। कन्हैया ने कहा, पुलिस यह कहकर झूठ बोल रही है कि सुबह जो कुछ हुआ वह सीट को लेकर हुआ झगड़ा था। 

मुंबई की लोकल ट्रेनों में सीट का झगड़ा होता है, विमानों में नहीं। उन्होंने कहा, मैं हमलावरों के खिलाफ मामले नहीं दर्ज कराना चाहता क्योंकि वे भी हमारे ही लोग हैं और उन्हें उकसाया गया है। लेकिन मैं इन चीजों से डरूंगा नहीं। गौरतलब है कि विमान में हुई घटना के कारण कन्हैया को सड़क के रास्ते पुणे आना पड़ा। भारत माता की जय के नारों और योग गुरु रामदेव के बयानों का हवाला देते हुए कन्हैया ने कहा, हम निश्चित तौर पर भारत माता की जय बोलेंगे, लेकिन आपको इस पर एकाधिकार किसने दिया? 29 साल के जेएनयू छात्र ने आरोप लगाया कि भारत माता की प्रकृति को बदला जा रहा है। 
उन्होंने कहा, पहले भारत माता एक हाथ में अनाज रखती थी और दूसरे हाथ में तिरंगा रखती थी। अब तिरंगे की जगह भगवा ने ले ली है। ये लोग राष्ट्रीय ध्वज को बदल देंगे। उन्हें राष्ट्रवाद से कोई लेना-देना नहीं है। वे एक धर्म और एक संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते हैं। कन्हैया ने कहा कि राष्ट्रवाद की तुलना ब्राह्मणवाद से की जा रही है जो देश के लिए खतरे का संकेत देता है। जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने इस बात को खारिज किया कि देश के छात्रों को प्रधानमंत्री के खिलाफ उकसाया जा रहा है। 
कन्हैया ने कहा, हमें मोदी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। हम अपने अधिकार मांग रहे हैं। हमें रोजगार दीजिए। जब हम लोगों के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों की बात करते हैं तो हमें देशद्रोही करार दे दिया जाता है। एफटीआईआई विवाद पर कन्हैया ने कहा कि आरएसएस सभी राष्ट्रीय संस्थाओं पर नियंत्रण कायम करने की कोशिश कर रहा है और देश के विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता से छेड़छाड़ की जा रही है। 

Wednesday, 27 April 2016

नहीं मानते रिपोर्ट, करेंगे आंदोलनः JNUSU



नई दिल्ली। जेएनयू के छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को यूनिवर्सिटी के निष्कासित करने के फैसले के बाद बवाल बढ़ गया है। छात्र संघ ने इस मामले पर देशव्यापी अभियान की धमकी दी है। जेएनयू प्रशासन ने ‘देशद्रोह’ मामले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद को अनुशासन तोड़ने का दोषी पाया था। जेएनयू प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कन्हैया कुमार पर दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है जबकि‍ उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया था।

कन्हैया कुमार ने किया ट्वीट

जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि हास्यास्पद जांच के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई बस अस्वीकार्य है और संघ इसे खारिज करता है। कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया कि जेएनयू हास्यास्पद समिति के आधार पर प्रशासन द्वारा दंड दिए जाने को खारिज करता है। अपने विरूद्ध फैसले को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए अनिर्बान और उमर ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई आरएसएस की शह पर परेशान करने जैसी है।

क्या था मामला ?

जेएनयू ने उमर खालिद को एक सेमेस्टर और मुजीब गट्टू को 2 सेमेस्टर के लिए निष्कासित किया है। जबिक अनिर्बान भट्टाचार्य पांच साल तक विश्वविद्यालय में कोई कोर्स नहीं कर सकते। इस मामले में जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने कुछ दिनों पहले अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कन्हैया सहित 21 छात्रों को दोषी माना गया। जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष, उपाध्यक्ष अनंत, छात्रसंघ के वर्तमान जनरल सेक्रेटरी रामा नागा समेत कुछ और छात्रों का एकेडमिक सस्पेंशन भी तय माना जा रहा था। देशद्रोह के मामले में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य छह महीने की जमानत पर जेल से बाहर हैं। इन पर देश के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप है।

https://puridunia.com/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85/104953

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नई दिल्ली

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी(जेएनयू) में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के मामले में आरोपी स्टूडेंट उमर खालिद और कन्हैया कुमार के खिलाफ हुई कार्रवाई का जेएनयूएसयू ने विरोध करने का फैसला किया है। जेएनयूएसयू प्रेजिडेंट कन्हैया ने कहा कि हम इस रिपोर्ट को खारिज करते हैं, क्योंकि यह एकतरफा जांच पर आधारित है और हमें अभी तक रिपोर्ट भी नहीं दी गई है।

उल्लेखनीय है कि उच्च स्तरीय जांच कमिटी की रिपोर्ट पर जेएनयू ने कार्रवाई करते हुए उमर को एक सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उमर के अलावा कन्हैया पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस मामले के अन्य आरोपी अनिर्बान को 15 जुलाई तक के लिए निष्कासित किया गया है। इसके बाद 25 जुलाई से अगले पांच साल के लिए अनिर्बान को जेएनयू कैंपस से बाहर किए जाने का फैसला किया गया है जिसके तहत वह जेएनयू के किसी भी कोर्स में एडमिशन नहीं ले सकेंगे।

जेएनयूएसयू की वाइस प्रेजिडेंट शहला राशिद ने कहा कि कमिटी ने बयान एक पक्ष से लिए और हमारे बार-बार कहने पर भी सही तरीके से जांच नहीं की गई। सभी छात्र निर्दोष और बहुत गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। ये सभी कार्यकर्ता हैं और यह सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन को कुचलने की साजिश है। कन्हैया ने कहा कि हमारी जनरल बॉडी की मीटिंग में छात्रों ने कमिटी की रिपोर्ट के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है। हम इसके खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

इधर, एबीवीपी के सौरभ शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ फैसला जेएनयू टीचर्स असोसिएशन के दबाव में लिया गया है। जेएनयूएसयू ने इसे लेकर रात में एक मीटिंग भी बुलाई, जिसमें आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई।
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Tuesday, 26 April 2016

छात्रों, मजदूरों,किसानों व साधारण जनता की एकजुटता का शहला राशिद का आह्वान



ग्यारह छात्र-युवा संगठनों की एक सम्मिलित गोष्ठी में 23 अप्रैल 2016 को मुंबई में जे एन यू , दिल्ली छात्र यूनियन की उपाध्यक्ष शहला राशिद ने बेहद तर्क-संगत व गंभीर उद्गारों की अभिव्यक्ति की। हालांकि एक छात्र नेता की हैसियत बताते हुये शहला ने अपनी बातों को रखा है परंतु वीडियो सुनने से लगता है कि, वह शिक्षात्मक दृष्टिकोण के साथ बोल रही थीं जो कि एक सराहनीय बात है। उन्होने अपने प्रदेश, महिला छात्राओं, किसानों,मजदूरों सभी की समस्याओं का उल्लेख करते हुये  कहा कि उन पर हस्तक्षेप करना छात्रों का कर्तव्य है और वही कर्तव्य - पालन वह तथा उनके साथी कर रहे हैं। उन्होने यह भी कहा कि जिन  विश्व विद्यालयों में छात्र संगठन नहीं हैं उनकी समस्याओं को भी उठाना उन सब का ही कर्तव्य है जिसको भी उन्हें मिल कर पूरा करना है। बंगलौर की महिला कपड़ा श्रमिकों की संघर्ष गाथा का उल्लेख करते हुये केंद्र सरकार को झुकाने के लिए उन्होने उनकी तारीफ की व उनसे प्रेरणा लेकर संघर्ष को बढ़ाने की बात कही।बंगलौर की एक भावुक घटना का उल्लेख करते हुये शहला ने बताया कि वहाँ जाने पर एक लड़की रोते हुये आकर उनके गले मिली और अपना दुखड़ा यह बताया कि उसका भाई और परिवार भाजपा का समर्थक है लेकिन उसको इन छात्रों की बात में सच्चाई लगती है इसीलिए वह परिवार से बगावत करके उनसे मिलने आई है। उन्होने एक दिन पूर्व की दिल्ली की घटना का उल्लेख करते हुये कहा कि जब वह अपनी पढ़ाई करके सोने जा रही थीं तभी उनको एक पूर्व आर एस एस कार्यकर्ता ने फोन करके सूचित किया कि वह कन्हैया , उमर , अनीबार्न के वीडियों देख सुन कर सच्चाई जान गया है और और लोगों को भी सच्चाई मानने के लिए प्रेरित कर रहा है। 

शहला ने यह भी कहा कि कन्हैया के हाल में प्रवेश करते समय लोगों में जो उत्साह था वह केवल AISF के ही नहीं थे बल्कि विभिन्न संगठनों से सम्बद्ध थे लेकिन न्याय की लड़ाई में वे सब साथ हैं। उन्होने लोगों से लंबे संघर्ष के लिए व्यापक एकजुटता की अपील के साथ अपनी बात का समापन किया। 

Sunday, 24 April 2016

जनता आखिर कब तक पीडित होगी,सूर्योदय होकर रहेगा ------ कन्हैया कुमार

Kanhaiya Kumar and Students leaders
(क्यों पूना जाते समय एयरवेज में कन्हैया कुमार पर प्राण घातक हमला हुआ और क्यों  वहाँ उसे पुलिस ने धारा १४४(२) के तहत भाषण न देने का आदेश दिया )



RSS की जातिवादी राजनीति छोड़ जनता के लिए कुछ काम करें PM मोदीः कन्हैया
अप्रैल 24, 2016 भारत

जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला और कहा कि मोदी सरकार को जुमलेबाजी और आरएसएस की जीतिवादी राजनीति को बंद कर जनता के लिए काम शुरू करना चाहिए, क्योंकि जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है। 

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एफटीआईआई के छात्र मुंबई में स्टूडेंट यूथ असेंबली के लिए मिले। इनमें जेएनयू छात्र संघ के नेता कन्हैया कुमार भी शामिल हुए। मुंबई में तिलक नगर में विद्यार्थियों की एक रैली में कन्हैया ने कहा कि जनता स्टैंड-अप इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसे जुमले और झूठे वादे तथा सांप्रदायिक-जातिवादी राजनीति नहीं चाहती, बल्कि वह शिक्षा, रोजगार, और विकास चाहती है। 

कन्हैया ने तालियों की गडगडाहट के बीच अपने भाषण में कहा, हमारी राजनीति सामाजिक न्याय की है, देश की आम जनता की मदद करने की है। देश के विद्यार्थी और श्रमिक एकजुट हो रहे हैं। इसलिए मोदी सरकार इतना डरी हुई है।

कन्हैया ने आरएसएस द्वारा प्रेरित जातिवादी राजनीति के पूर्ण सफाए की मांग की और कहा कि उनका संघर्ष लोकतंत्र को बचाने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने तथा सशक्तिकरण को लेकर है। 

उन्होंने कहा, जनता आखिर कब तक पीडित होगी,सूर्योदय होकर रहेगा। कन्हैया यहां वामपंथी, छात्र एवं युवा संगठनों की ओर से आयोजित एक शैक्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हुए थे। इसके बाद रविवार को वह पुणे में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

कन्हैया कुमार ने कहा सेल्फी खींचने वाले पीएम के साथ, सेल्फी खींचकर आप आंदोलन नहीं जीत सकते। जुमलेबाज़ों और जांबाज़ों में संघर्ष छिड़ा है। इनकी नफरत देखिए हर शहर में मुझ पर जूता फेंकते हैं, लेकिन वो भी सिर्फ दाएं पैर का, अगर लेफ्ट भी फेंक दें तो जोड़ी बन जाए। कन्हैया यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा सरकार कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन ये 'मेक इन इंडिया' नहीं फेक इन इंडिया है।

http://www.hindkhabar.in/india/2121-pm-modi-do-some-work-for-people-not-rss

' कन्हैया पर जेट एयरवेज़ की फ्लाइट में हमला, गला दबाने की कोशिश'



जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया का आरोप है कि जेट एयरवेज के विमान में उनका गला दबाने की कोशिश की गई। एक यात्री ने उन पर हमला किया और गला दबाने का प्रयास किया


Yet again, this time inside the aircraft, a man tries to strangulate me.

कन्हैया ने इस बाबत ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा- एक बार फिर, इस बार विमान के भीतर, एक शख्स ने मेरा गला घोंटने की कोशिश की।"

After the incident @jetairways staff completely refuses to take any action against the man who assaulted me.

कन्हैया ने जेट एयरवेज पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हमें और हमलावर को उतार दिया गया। उस पर कोई कार्रवाई नहीं कई गई। अगर आप शिकायत करेंगे तो वो आपको उतार देंगे।

Basically @jetairways sees no difference between someone who assaults nd d person who is assaulted. They will deplane you, if you complain.
**** === साभार =============
http://www.livehindustan.com/news/national/article1-kanhaiya-kumar-jet-airways-528758.html

Thursday, 21 April 2016

कन्हैया युवा वर्ग की आवाज बनता जा रहा है ------ प्रिया कुमारी


‪#‎कन्हैया‬ : कैसे एक गर्वित भारतीय बन गया 'देशद्रोही'
यह 2007 की बात थी, दिल्ली में एक इंटर-यूनिवर्सिटी कल्चरल मीट में कार्यक्रम की शुरुआत से पहले छात्रों को एक घंटे तक बोलने का मौका दिया गया था। डिबेट में भाग लेने वाली कन्हैया कीे दोस्त और एआईएसएफ की सदस्य राहिला परवीन ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'इस डिबेट में कन्हैया ने पूरे जज्बे और दिल के साथ अपनी बात रखी थी। भले ही वह पुरस्कार नहीं जीत पाया था, लेकिन उसके भाषण से कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। इस भाषण प्रतियोगिता का टॉपिक था, मुझे भारतीय होने पर गर्व है।
अब करीब एक दशक बाद कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का आरोप लगा है । उसे देशविरोधी नारें लगाने के आरोप में गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल में डाल दिया गया था ।
उसको कोर्ट परिसर में दो दिन मारा पीटा गया , कुछ फर्जी देशभक्तों ने उसके साथ बदसलूकी की , मारपीट की और उसको लगातार टोर्चर किया गया ।
22 दिन जेल में रहने के बाद उसको जमानत मिली ।
अभी भी उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है ।
अब कन्हैया युवा वर्ग की आवाज बनता जा रहा है । रातोंरात वह छात्रों का हीरो बन गया है । पढ़ा-लिखा और शिक्षित वर्ग उसके समर्थन में आ गये हैं । लोग उसको सुनना चाहते हैं ।
वो आम लोगों की बात उठा रहा है ।
वो कई आंदोलनों का पोस्टर बाॅय बन गया है ।
काॅग्रेंस पार्टी ने उसको अपने पोस्टर में बड़ी जगह दी है।
कन्हैया का खुद के प्रति आत्मविश्वास, जमीनी और ओजस्वी भाषण के चलते चर्चित है। यूट्यूब के एक विडियो में भी देखा जा सकता है कि सितंबर में जेएनयू चुनाव के दौरान वह कैसे प्रतिद्वंद्वी वामपंथी उम्मीदवार और कैसे वह '56 इंच की नकली छाती' पर हमला बोलता है। यही वजह थी कि कन्हैया के पक्ष में न्यूट्रल वोट भी पड़ा और वह जेएनयू में एआईएसएफ की ओर से पहला प्रेजिडेंट बना। उनके भाषण बताते हैं कि उन्हें कम्युनिस्ट पॉलिटिक्स में कितना विश्वास है। एक वक्त में छोटे कॉन्ट्रैक्टर रहे उनके पिता जय शंकर सिंह ने कहा, 'हमारा पूरा परिवार ही वामपंथी विचारधारा से जुड़ा रहा है।'
कन्हैया का परिवार ही नहीं बल्कि उनके गांव बीहट को भी इलाके में 'मिनी मॉस्को' के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि पूरी दुनिया बदल सकती है, लेकिन यहां सीपीआई का सांगठनिक आधार हमेशा से मजबूत रहा है। सुबोध मालाकार ने कहा, 'बाजार में सीपीआई और इप्टा दोनों का ऑफिस है।'
कन्हैया के भाई बताते हैं कि कन्हैया ने स्कुली शिक्षा बरौनी और मोकामा से ली है और काॅलेज की पढ़ाई के लिए कन्हैया पटना चला गया था ।
एआईएसएफ के राष्ट्रीय महासचिव बिस्वजीत कुमार ने कहा कि कन्हैया कुमार ने 2002 में एआईएसएफ जॉइन किया था। तीन साल बाद ही वह मगध यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्रेजिडेंट चुने गए।
कन्हैया के दोस्त और पार्टी सदस्य बताते हैं कि बिहार से हजारों युवाओं की तरह वह भी सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए दिल्ली आए थे। राहिला बताती हैं, 'कन्हैया ने बिहार पब्लिक सर्विसेज कमिशन की एक बार परीक्षा भी दी थी।'
#कन्हैया की जिंदगी के कुछ पहलू यह भी :-
कन्हैया ने कई इंटर-कॉलेज और इंटर-यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते।
रामधारी सिंह 'दिनकर', नागार्जुन और दुष्यंत की कविताओं को वह पसंद करते रहे हैं।
डफली बजाने और क्रांतिकारी गीत गाने का उन्हें पुराना शौक रहा है। इनमें से ही एक भोजपुरी गीत है 'कह बा ता लाग जाई धक से' भी है।
राजकपूर की मशहूर फिल्म श्री 420 का गीत 'दिल का हाल सुने दिलवाला' उनका पसंदीदा फिल्मी गीत है।

साभार : 
Priya Kumari

Sunday, 17 April 2016

जो लोग संविधान के पक्ष में हैं वे एक तरफ आना होगा ------ कन्हैया कुमार

 डॉ अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल 2016 , नागपूर :






नागपुर । जेएनयू अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार का दावा है कि भारत से अलग पाकिस्‍तान बनाने की अवधारणा मोहम्‍मद अली जिन्‍ना के बजाय सबसे पहले वीर सावरकर ने रखी थी। नागपुर में कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में कन्‍हैया ने यह दावा किया।

इससे पहले उन्‍होंने कहा कि देश को मोदी से, संसद को आरएसएस से और संविधान को मनुस्‍मृति से बदले जाने के खिलाफ वे लड़ाई लड़ते रहेंगे। कन्‍हैया से जब पूछा गया कि कांग्रेस के सह आयोजन वाले कार्यक्रम का न्‍योता उन्‍होंने कैसे स्‍वीकार किया।

इस पर जवाब आया,’मैंने किसी को मुझे बुलाने के लिए नहीं कहा। यह देश संविधान से चलेगा या मनुस्‍मृति से इस सवाल पर लोकतंत्र में हमें एक लाइन खींचनी होगी। जो लोग संविधान के पक्ष में हैं वे एक तरफ आना होगा। मेरे भाषण में मैंने लोकतंत्र को लेकर मौजूद खतरे पर ही चर्चा की।

जहां तक साम्‍प्रदायिकता की बात है तो हमें इतिहास में जाना होगा जहां से इसकी शुरुआत हुई। दो देशों की धारणा की नींव रखने वाले सावरकर थे न कि मोहम्‍मद अली जिन्‍ना।’ नेशनल कॉलेज में कन्‍हैया पर जूता भी फेंका गया, इस बारे में उन्‍होंने कहा,’जब मैं जेल से नहीं घबराया तो जूते से कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर आप हिंदुत्‍व के सच्‍चे सिपहसालार हैं तो आप हिंसा क्‍यों कर रहे हैं।’ उन्‍होंने कहा,’नागपुर संघभूमि नहीं दीक्षाभू‍मि है। इसका संबंध अंबेडकर से न कि गोलवलकर से, ठीक वैसे ही जैसे गुजरात का संबंध गांधी से न कि मोदी से। इस शहर में फुल दिमाग वाले लोग रहते हैं न कि हाफ वाल पैंट वाले।’ कन्‍हैया ने आरएसएस और भाजपा को हिटलर के बाराती की संज्ञा भी दे डाली।

कन्‍हैया ने पीएम मोदी के 56 इंच के सीने वाले बयान पर हमला करते हुए कहा,’ सामाजिक आर्थिक समानता के लिए हमें लड़ना होगा। 56 इंच के सीने वालों को हम 18 इंच के सीने वाले मिलकर नीचे गिराएंगे।’

जूते फेंकने की घटना के बारे में उन्‍होंने कहा,’ ये वही लोग हैं जिन्‍होंने आजादी के 50 साल बाद तक तिरंगा नहीं फहराया। जिन्‍होंने अंग्रेजों के लिए जासूसी की। देश को लूटा। अब वे हमें देशभक्ति सिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

हमने जेएनयू में कभी देश विरोधी ताकतों की मदद नहीं की। इन लोगों ने छेड़छाड़ कर वीडियो बनाए। राज्‍य सभा टिकट का वादा कर एक टीवी चैनल के मालिक को खरीद लिया और मेरी छवि खराब करने की कोशिश की।’

साभार :
http://www.rashtradhara.com/national-news/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%B2%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98-%E0%A4%94%E0%A4%B0/


कन्हैया कुमार की नागपूर स्पीच :


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Monday, 11 April 2016

देश के नौजवानों से युद्ध छेड़ने वाली सरकार जितनी कायर होती है उतनी ही निर्मम ------ सुयश सुप्रभ

***इस फ़ोटो में कन्हैया अपने मस्त अंदाज़ में डफली बजाते दिख रहे हैं। क्या अब वे इसी तरह निश्चिंत होकर सड़कों पर डफली बजा सकते हैं? नहीं, इस सरकार ने अपनी निर्ममता दिखाते हुए उनसे उनकी आज़ादी छीन ली है। अपने पालतू चैनल की मदद से उनकी ऐसी छवि बना दी कि वे अब कहीं भी निश्चिंत होकर न तो चाय पी सकते हैं न सड़कों पर निकलकर अपने साथियों के साथ कुछ पल ज़माने से बेपरवाह होकर हँस-गा सकते हैं। यह बेपरवाही हम सभी की ज़िंदगी का हिस्सा है। इसके बिना हमारी ज़िंदगी बोझिल हो जाती है। कैंपसों के बहुत-से साथियों से यह अनमोल पल-दो पल की बेपरवाही छीनने वाली सरकार की निर्ममता वही समझ सकते हैं जिन्हें युवाओं के सपनों और मुस्कुराहट की अहमियत मालूम हो। आज कन्हैया राजनीति में भले ही राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो गए हों लेकिन ढाबे पर अपनी मस्ती में गपियाता नौजवान अचानक बहुत ज़्यादा सावधान और गंभीर हो गया है। यही बात उमर और अनिर्बान पर भी लागू होती है।
हाल ही में एक इंटरव्यू में कन्हैया ने कहा कि जब एक दिन उन्हें अपनी जेब में मुड़ा-तुड़ा मेट्रो कार्ड दिखा तो उसे देखकर उनके मन में यह सवाल आया कि क्या वे इसका कभी इस्तेमाल कर पाएँगे। इस सवाल में जो दर्द छिपा है उसकी अनदेखी मत कीजिए। यह आपके देश के एक ऐसे युवक का दर्द है जो समाज के लिए ही जीता आया है और समाज के लिए ही मर जाने की बात करता है। अपने देश के नौजवानों से युद्ध छेड़ने वाली सरकार जितनी कायर होती है उतनी ही निर्मम।***


https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10154117223214696&set=a.128015264695.103352.832064695&type=3

ए आई एस एफ ने कन्हैया कुमार को मोमेंटम दे कर सम्मानित किया है : 

कन्हैया ने अपने सादगीपूर्ण आचरण से सबका मन मोह लिया है :


कंवल भारती जी की चिंता वाजिब है खुद को 'नास्तिक' - एथीस्ट घोषित करने की ज़िद्द में हमारे देश में वामपंथी खुद को जनता से अलग किए हुये हैं जिस कारण जनता का भारी अहित हो रहा है और वह कठिन संकट में फँसती लग रही है, जैसा की सुयश सुप्रभ जी की चेतावनी से भी स्पष्ट है। 

भारती जी केवल संगठनात्मक ढांचे में तबदीली चाहते हैं जबकि वास्तविक ज़रूरत यह है कि, आर्थिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के साथ-साथ सामाजिक उत्पीड़न और शोषण के विरुद्ध भी आवाज़ उठाकर ब्राह्मण वाद को निष्प्रभावी किया जाए। जिस  दिन वामपंथ यह करने में सफल हो जाएगा उसी दिन जनता के संकट हल हो जाएँगे। अतः वर्तमान संकट के लिए वामपंथ खुद भी उत्तरदाई है जैसा कि, अनिर्बन भट्टाचार्य ने भी इंगित किया है। 


हमें लोगों के रुझान को देखने की ज़रूरत है : अनिर्बन भट्टाचार्य 


Sunday, 10 April 2016

‘ये संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई है’: कन्हैया कुमार




कन्हैया कुमार ने मांगा सहयोग, कहा ‘ये संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई है’
IN बड़ी खबर, राजनीति / BY TEAMDIGITAL / ON APRIL 9, 2016 AT 5:32 AM /


नई दिल्ली । जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष और देशद्रोह का आरोप झेल रहे कन्हैया कुमार अब केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ खुलकर मैदान में आ गए हैं । कन्हैया कुमार ने अपनी मुहिम को संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई बताया है ।

केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए विश्वविद्यालय छात्र संघों के नेताओं ने एकीकृत संघर्ष पर जोर दिया और जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने इसे संघिस्तान बनाम हिंदुस्तान की लड़ाई करार दिया। मतभेदों को जीवित रखकर और सेमिनारों के बाहर निकल कर एक एकीकृत मोर्चा बनाने के एआईएसएफ सदस्य कन्हैया के आह्वान को काफी समर्थन मिलता नजर आया।

आइसा की सदस्य और जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा, डीएसयू के पूर्व नेता उमर खालिद, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष रिचा सिंह ने यहां एक कार्यक्रम में कन्हैया के आह्वान का समर्थन किया। गौरतलब है कि भाकपा की छात्र शाखा ऑल इंडिया स्टूडेंटस फेडरेशन, भाकपा-माले की छात्र शाखा ऑल इंडिया स्टूडेंटस असोसिएशन, डेमोक्रेटिक स्टूडेंटस यूनियन अलग-अलग विचारधारा वाले वामपंथी छात्र संगठन हैं। रिचा निर्दलीय छात्र नेता हैं।

जनवरी महीने में खुदकुशी कर चुके हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला के करीबी दोस्त, एचसीयू के छात्र और अंबेडकर स्टूडेंटस असोसिएशन के सदस्य डी प्रशांत भी प्रतिरोध 2 नाम के इस कार्यक्रम में शामिल थे। इस कार्यक्रम में वाम समर्थित छात्र नेताओं को मंच साझा करते देखा गया।

रिचा ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बाद भी साथ आने की जरूरत है। कार्यक्रम में वामपंथी बुद्धिजीवियों को संबोधित करते हुए कन्हैया ने कहा कि उन्हें पुरानी पीढ़ी से शिकायत है कि उन्होंने मतभेद इस हद तक बढ़ा दिए हैं कि एकता लाने की कवायद में हमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा, यदि आपने यह किया होता तो हमारे लिए गांधी और अंबेडकर को एकजुट करना इतना मुश्किल नहीं होता। आरएसएस की हिंसा के खिलाफ हम एक साथ खड़े क्यों नहीं होते, हमें सेमिनार हॉलों से निकलकर हमारे गांवों तक अपनी ये लड़ाई ले जानी होगी।

एनआईटी श्रीनगर में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कन्हैया ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों के भीतर जो युद्ध छेड़ा गया है, वह लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संस्थान परिसरों को युद्ध के मैदान में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा, मैं श्रीनगर में हुई हिंसा और एचसीयू में हुई हिंसा की निंदा करता हूं क्योंकि यह संस्थागत हिंसा है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।







शहला ने कहा कि राजनीतिक संगठन अक्सर अपने मतभेदों को दरकिनार कर एक साथ आने की जरूरत पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा, हम कहेंगे कि हम अपने मतभेद जीवित रखें, और तब उन्हें हराने के लिए एकजुट हों। हम इस राजनीतिक विविधता पर गर्व करते हैं।



साभार :
http://lokbharat.com/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B9/

Thursday, 7 April 2016

जब वामपंथी दलों का आकर्षण बंगाल, केरल में भी कम हुआ है, कन्हैया कुमार का उभरना बहुत महत्वपूर्ण है ----- उर्मिलेश (वरिष्ठ पत्रकार )




'क्या वामपंथी दे सकते हैं राजनीतिक विकल्प'
उर्मिलेश (वरिष्ठ पत्रकार ) : 04-04-2016 
सरकार आई थी प्रचंड बहुमत से, जिसको जनता ने सबका साथ, सबका विकास और एक बेहतर शासन, बेहतर गवर्नेंस, डेवेलपमेंट मुद्दों पर बहुमत दिया था.
तो कहीं न कहीं इन कुछ महीनों में जो उसकी परफॉर्मेंस रही है उससे एक तरह से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया गया है.
प्राइम टाइम में जेएनयू का मुद्दा लाया गया, जिससे सरकार की विफलताओं पर चर्चा न हो सके.
केंद्र में जो भाजपा नेतृत्व वाली सरकार है, उसे जनता ने बहुत बड़े समर्थन से जिताया है और उसका अभी तीन वर्ष से ज़्यादा का कार्यकाल बाक़ी है.

इस बीच में सरकार की ओर से जो पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन, पॉलिसी एक्ज़ीक्यूशन हो रहा है, उससे लोगों में निराशा है.
लेकिन विपक्ष की ओर से कोई बड़ा नेता, जो सबको स्वीकार हो ऐसा कोई नहीं उभरकर आ सका है.
वामपंथी दलों का देश में बहुत ही बुरा हाल है. केरल, बंगाल में जो ताक़त उनकी हुआ करती थी, वहां भी वो कमज़ोर हो गए हैं. कुल मिलाकर एक छोटा राज्य त्रिपुरा बचा है.

ऐसे दौर में जब वामपंथी दलों का आकर्षण बंगाल, केरल में भी कम हुआ है, कन्हैया कुमार का उभरना बहुत महत्वपूर्ण है.
अब देखना होगा कि क्या रोहित वेमुला की लड़ाई से जो एक दलित विमर्श सामने आया है, क्या ये जो वामपंथी छात्र हैं, वामपंथी संगठन हैं, एक राजनीतिक विकल्प दे सकते हैं.
इससे भारत में अगर आज कोई बड़ा वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व उभर सकता है तो वो दलित और अन्य समाज हैं. ख़ासकर जिसे सामाजिक भाषा में बहुजन कहा जाता है.
तो अगर पॉलिटिकल विमर्श उभरकर सामने आता है, जिसमें दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और उच्चवर्ग का प्रोग्रेसिव हिस्सा जुड़ता है, तो मोदी सरकार और मोदी की राजनीति के ख़िलाफ़ एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी के साथ बातचीत पर आधारित)


Monday, 4 April 2016

The BJP is clearly violating the 10th schedule of the Indian Constitution ------ Atul Kumar Anjaan


Anjan calls RSS, BJP pseudo-nationalists over anthem row

Dhritiman Ray | TNN | Apr 3, 2016, 07.40 PM IST

RANCHI: Senior communist leader Atul Kumar Anjaan on Sunday reacted sharply to RSS general secretary Bhaiya Joshi's comment on national anthem and called the outfit pseudo-nationalists.
"RSS is a pseudo-nationalist organization. There is not a single example of a RSS leader being imprisoned for the independence movement. On what grounds are they saying this?" the Communist Party of India (CPI) leader said after the two-day state working committee meeting here.
Late last week Joshi had said Vande Mataram was the country's real national anthem and not Jan Gan Man because of its association with the country's independence struggle against the British Raj.
Anjan took a jibe at RSS by referring to one of its founder MS Golwalkar and his letters. "Golwakar had no serious affiliations to the country's independence and he talked of being a non-believer in the national flag. The RSS is doing the same thing now," Anjan said here.
Anjan also requested Lok Sabha speaker Sumitra Mahajan and Union minister for Parliamentary affairs Venkaiah Naidu to convene a meeting of the opposition parties ahead of the extended budget session. "The BJP is clearly violating the 10th schedule of the Indian Constitution by attempting wrongful defections in Uttarakhand and other states. It is deliberately creating communal divide. The party needs to have a large heart to run a huge country like India," he added.

http://timesofindia.indiatimes.com/city/ranchi/Anjan-calls-RSS-BJP-pseudo-nationalists-over-anthem-row/articleshow/51672366.cms
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फेसबुक 04-04-16 

Saturday, 2 April 2016

भारत में साम्यवाद की संभावनाएं ------ विजय राजबली माथुर

1992 में जब निम्नांकित लेख लिखा था और जो उम्मीद तब ज़ाहिर की थी वह पूर्ण नहीं हुई है क्योंकि सभी प्रकार के साम्यवादी/वामपंथी दल 'एथीज़्म' : 'नास्तिकता " के भ्रमजाल में फंसे होने के कारण जीवन व समाज की वास्तविक व यथार्थ आवश्यकताओं की उपेक्षा करके मात्र आर्थिक आधार पर वर्गीय एकता बना कर सफलता की कपोल-कल्पना किए  सोये हुये बैठे हैं। मार्क्स साहब के अनुसार पूर्ण औद्योगीकरण के बाद साम्यवादी क्रान्ति होनी थी किन्तु 1917 व 1949 की रूसी व चीनी साम्यवादी क्रांतियाँ कृषी- प्रधान देशों में हुईं थीं फिर उनका औद्योगीकरण किया गया तथा वास्तविक 'धर्म' के 'मर्म' को न मानने के कारण उसका पालन नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप रूस में साम्यवाद उखड़ गया तो चीन में STATE-CAPITALISM में परिवर्तित हो गया है। इन सबका सबक हमारे देश के किसी भी साम्यवादी दल ने नहीं लिया है और आज भी लकीर के फकीर बन कर चल रहे हैं। फलतः पहले चरण में 1998 से 2004 तक सांप्रदायिक शक्तियों के नेतृत्व में सत्ता चली गई थी और दूसरे चरण में 2014 में आ गई है जो नित्य नए-नए फासिस्टी तरीकों से जकड़ती जा रही है। 24 वर्ष बाद फिर से उस पुराने लेख को प्रकाशित करने का उद्देश्य यही है कि, इस वक्त जिस परिवर्तन की बात छात्र नेता कामरेड कन्हैया कुमार ने उठाई है उसकी 80 प्रतिशत बातों का उल्लेख इस लेख में भी समाहित है। 20 प्रतिशत 'धर्म' संबंधी दृष्टिकोण पर कामरेड कन्हैया भी लकीर के फकीर वाली 'नास्तिकता' की डगर पर चल रहे हैं। सभी साम्यवादी व जन -वादी तत्व जब तक वास्तविक 'धर्म' का 'मर्म' जनता के समक्ष नहीं रखते तब तक साप्रदायिक/ फासिस्ट शक्तियों को ही मजबूत करते जाएँगे और ऐसा होगा उनके ब्राह्मण वादी नेतृत्व की असली मानसिकता के कारण। 


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आज जब विश्व के प्रथम साम्यवादी राष्ट्र का विघटन हो चुका है और वहाँ पूर्णतय : साम्यवाद को नकार दिया गया है, प्रस्तुत शीर्षक कुछ लोगों को हास्यास्पद प्रतीत हो सकता है। विगत पाँच -छह वर्षों से जबसे  कि, श्री मिखाईल गोर्बाचोव  ने ग्लासनास्त और पेरेस्त्रोईका के नाम पर सोवियत रूस से साम्यवाद की जड़ें छांटना प्रारम्भ की थीं भारत के हम साम्यवादियों में  से अधिकांश को निराशा ही हुई थी और यहाँ अपना भविष्य अंधकारमय प्रतीत होने लगा था । पुनः 1989 और 1991 के चुनावों में भाजपा की सांप्रदायिक बढ़त से हम सहसा हताश होते हुये लोगों को पाते हैं।

परंतु इस संबंध में व्यक्तिगत रूप से मेरा दूसरा ही दृष्टिकोण है। मैं समझता हूँ कि, भारत में अब हमारे लिए अपने विस्तार के लिए परिस्थितियाँ और अधिक अनुकूल हैं । एक तो अब हमें परमुखापेक्षी नहीं रहना है अब हमारी पार्टी की नीतियाँ विशुद्ध रूप से भारतीय वांगमय के मद्दे नज़र बनेंगी और दूसरे भाजपा रूपी सांप्रदायिक एवं विघटनकारी शक्तियों ( जो कि, निश्चित रूप से साम्राज्यवादियों के हाथों में खेल रही हैं ) से टक्कर लेने के लिए समान विचारों वाली जनवादी शक्तियों से मिलकर कार्य करने से हमें अपने विस्तार हेतु क्षेत्र स्वतः ही मिलते जाएँगे।

हमारे विपक्षी हमारी सबसे बड़ी आलोचना इस बात को लेकर करते हैं कि, साम्यवाद के प्रणेता रूस ने ही क्रांतिकारी योद्धाओं का लेनिन, का स्टालिन आदि की मूर्तियाँ ही नहीं उखाड़ फेंकीं उनकी प्रेरक विचार धारा को ही रसातल में समाविष्ट कर दिया तो हम किस आधार पर भारत में साम्यवाद की सफलता की बात करते हैं? और जबकि यहाँ पिछले दो निर्वाचनों ने सांप्रदायिक शक्तियों को ही बल प्रदान किया है।

मेरी राय में हम अपने आलोचकों को मुंहतोड़ जवाब कुछ इस प्रकार से दे सकते हैं कि, उनका आधार ही समाप्त हो जाये। हमें यह कहना होगा कि, साम्यवाद मूलतः भारतीय विचार धारा है । भारतीय चिंतकों ने समय-समय पर मानव कल्याण और मानव द्वारा मानव के शोषण समाप्ति हेतु जो मन्तव्य व्यक्त किए और जिनका कि, उल्लेख हमारे प्राचीनतम ग्रन्थों में आज भी उपलब्ध है । महान दार्शनिक मैक्समूलर सा : भारत में 30 वर्ष रह कर इन ग्रन्थों का मनन और अनुवाद कर जब जर्मन वापिस लौटे तो भारतीय संस्कृति से साम्यवादी विचार भी ले गए। महर्षि कार्ल मार्क्स ने समस्त दर्शनों का गहन अध्यन करने के बाद साम्यवादी सिद्धांतों को मानव- कल्याण के उपयुक्त पाया और उन्होने देश - काल की परिस्थितियों के अनुरूप जो दर्शन प्रस्तुत किया और जिसे उनके ही नाम पर हम आज मार्क्सवादी दर्शन कहते हैं वह वस्तुतः मौलिक रूप से भारतीय अवधारणा ही है। हमारी संस्कृति में व्यष्टि की अपेक्षा समष्टि पर बल दिया गया है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने " वसुधेव कुटुंबकम " का उद्घोष किया जो हमारे आज के " दुनिया के मजदूरों एक हो " के ही अनुरूप है। हमारे प्राचीन ऋषि समस्त मानवता , सम्पूर्ण विश्व को एक समाज इकाई के रूप में मान कर सबके कल्याण की बात करते हैं और यही बात मार्क्स सा : भी कहते हैं कि, विश्व- व्यापी साम्यवादी व्यवस्था में ही मानव- कल्याण संभव है।

आज सोवियत रूस समेत पूर्वी यूरोप में साम्यवाद का जो पराभव प्रतीत होता है वह वास्तव में साम्यवाद के मूलभूत तत्वों का यथार्थ पालन न हो पाने के कारण है। हम भारत में योगीराज श्री कृष्ण का दृष्टांत प्रस्तुत कर सकते हैं जिन्होंने महाभारत समर के समय अर्जुन को यह उपदेश देते हुये कहा था कि, " अर्जुनस्य द्वै प्रतिज्ञे, न दैन्यम, न पलायनम " अर्थात कि, हे अर्जुन यह दो प्रतिज्ञाए याद रखो कि, न तो कभी दीनता दिखाना और न ही पलायन करना तभी विजय संभव है। हम देखते हैं कि,  श्री मिखाईल गोर्बाचोव सतत पलायन करते हुये साम्राज्यवादियों  के समक्ष दैन्यवश घुटने टेकते चले गए इसी लिए पराजित हुये।

प्रसंगवश यहाँ यह बताना गलत न होगा कि, हमारी प्राचीन संस्कृति का दुरुपयोग तथाकथित धर्म के ठेकेदारों द्वारा सतत रूप से किया जाता रहा है और हम भारतीय साम्यवादी  खुद को "धर्म" विरोधी घोषित करने के कारण उस पर मौन रहे हैं। वास्तव में वे धर्म के अलमबरदार धर्म का आशय ही नहीं जानते और हमने कभी उनका पर्दाफाश ही नहीं किया । योगीराज श्री कृष्ण ने भी जिसे माना था वह धर्म है - सत्य, अहिंसा(मनसा-वाचा-कर्मणा ),  अस्तेय , अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य का समुच्य। इस संदर्भ में हम देखते हैं कि, भाजपा आदि तथाकथित धर्म के ठेकेदार ही इस धर्म का उल्लंघन करने के दोषी हैं।
(1 ) कारण कि, वे इस 'सत्य ' को ही स्वीकारने को प्रस्तुत नहीं हैं कि, भारतीय संस्कृति समष्टिवाद पर आधारित है न कि, व्यष्टिवाद जो कि पूंजीवाद का पर्याय है।   
(2 ) निजी लाभ के लिए वे ही दलित और दमित जन के लिए 'हिंसा' का प्रयोग करते हैं और मनसा-वाचा-कर्मणा समग्र रूप में ।
(3 ) वे धर्म के अलमबरदार कहलाने वाले ही 'कर-वंचना' करते हैं अर्थात 'अस्तेय' का पालन नहीं करते हैं।, और
(4 ) जमाखोरी तो उनके जीवन की धारा ही है जिसके द्वारा आभाव उत्पन्न कर वे जन-जन का शोषण करते हैं।
(5 ) ब्रह्मचर्य का पालन कितना करते हैं यह बात उनके नाईट क्लबों (इंडियन क्लब सरीखे ) से ही पता चल जाएगी।

स्वामी विवेकानंद जिन्हे वे अपने संकीर्ण दायरे में रख कर प्रचारित करते हैं, स्वम्य गरीबों और दुखियों के पक्षधर थे और सांप्रदायिक विद्वेष के विरुद्ध थे। एक मुसलमान का हुक्का गुड़गुड़ाने पर उन्हें जो प्रताड़णा मिली उसी से प्रेरित होकर वह घर-परिवार छोड़ कर समष्टि के कल्याण हेतु निकल पड़े। स्वामी विवेकानंद ने स्पष्ट कहा था कि, जब तक भारत में निर्धन की झोंपड़ी में खुशी का दीपक नहीं जलता भारत प्रगति नहीं कर सकता। यह एक वाक्य ही साम्यवादी दर्शन की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त है। आवश्यकता है तो इस बात की कि, हम भारतीय संस्कृति से समष्टिवादी सिद्धांतों और तर्कों को ढूंढ कर भारतीय मनीषियों द्वारा व्यक्त विचारों से पुष्ट करते हुये जनता को अपने स्तर से जाग्रत करें तभी हम सांप्रदायिक शक्तियों भाजपा आदि को शिकस्त दे सकते हैं।

आज श्री राम के नाम पर उन्होने बवंडर उठाया हुआ है । हम जन-जन को समझा सकते हैं कि, श्री राम ने तत्कालीन साम्राज्यवाद के सरगना रावण को नष्ट करके भारत की जनता को शोषण और उत्पीड़न से बचाया था। लेकिन आज साम्राज्यवादियों की सहायक लुटेरी शक्तियाँ उनके नाम का सर्वथा दुरुपयोग कर रही हैं।
(रावण - वध एक पूर्व निर्धारित योजना --- http://krantiswar.blogspot.in/2015/10/blog-post_5.html
जब श्री राम ने स्वम्य भारत में एकाधिकारवादी राज्य की स्थापना की ओर कदम बढ़ाया तो तत्कालीन राजनीति के मनीषियों की प्रेरणा पर सीता ने राजमहल से विद्रोह कर दिया और वाल्मीकि मुनि के आश्रम में आश्रय लेकर अपने पुत्रों लव- कुश को राम के जन- विरोधी राज्य के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी। लव-कुश ने जन -सहयोग से मध्य भारत में जनवादी पंचायती राज्य की स्थापना कर डाली और उस पर आक्रमण करके श्री राम को परास्त होना पड़ा। राम जन - शक्ति के आगे झुके और भविष्य में अपने राज्य को जनवादी सिद्धांतों पर चलाने को राज़ी हुये।
(1 ) http://krantiswar.blogspot.in/2011/02/blog-post_19.html
(2 ) http://krantiswar.blogspot.in/2011/04/blog-post_27.html
(3 ) http://krantiswar.blogspot.in/2011/04/blog-post_12.html 
(4 ) http://krantiswar.blogspot.in/2011/04/blog-post_30.html
यदि हम भारतीय संस्कृति से दृष्टांत ले कर जन - कल्याणकारी साम्यवादी सिद्धांतों का प्रचार करें और सांप्रदायिक शक्तियों पर प्रहार करें तो सफलता निश्चित ही हमारे चरण चूम लेगी। मुझे ऐसी आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास भी है और इसी कारण मैं भारत में साम्यवाद की उज्ज्वल संभावनाओं की उम्मीद करता हूँ। बस भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहित  सभी वांम - दलों को भारतीय संदर्भों पर विशेष बल देने की ही आवश्यकता है। मार्ग स्वतः ही सुगम होता जाएगा।

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