Wednesday, 26 October 2016

देश में लगी आग बुझाने का काम करते हैं ------ कन्हैया कुमार




छात्र नेता कन्हैया कुमार जो अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं 23 अक्तूबर 2016 को लुधियाना में भरी जनसभा में लोगों का आह्वान कर गए हैं कि , अब समय आ गया है जब 80 प्रतिशत गरीब,पिछ्ड़े, उपेक्षित लोगों को अपने शोषण व लूट के विरुद्ध उठ खड़े होना होगा। अगर ऐसा न हो सका तो देश धू - धू कर जल उठेगा। उनका प्रयास इस केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई आग को बुझाने का प्रयास करना है। उनके भाषण की कुछ खास खास बातें इस प्रकार हैं :

*एक किसान अपनी उपज का सरप्लस पुनः उत्पादन में लगाता है जबकि ये पूंजीपति अपने सरप्लस को सट्टे में लगाते हैं जिसका देश और जनता को कोई लाभ नहीं मिलता है। 

* शिक्षा को भी अब पाउच शिक्षा में बदल दिया गया है । जो साधन सम्पन्न हैं उनके लिए पूर्ण शिक्षा और जिनके पास धन व साधन नहीं हैं उनके लिए डिप्लोमा यानि कि, पाउच शिक्षा जो किसी काम की नहीं है। 

*जिस हिन्दू हित  की बात यह सरकार करती है वह भी झूठ है क्योंकि जो 70 प्रतिशत लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हुये हैं उनमे भी तो 70 प्रतिशत लोग हिन्दू ही हैं उनके हित के लिए इस सरकार के पास कोई योजना नहीं है फिर किस बात का हिंदूवाद? मतलब कि यह सरकार खुद ही हिन्दू विरोधी भी है। 

*क्रांतिकारी भगत सिंह का नाम मिटा कर मंगलसेन का नाम लाया जा रहा है कौन थे वह क्या जनता उनको जानती है? भगत सिंह को चिंतक - दार्शनिक होने के कारण परिदृश्य से हटाया जा रहा है। 

Sunday, 23 October 2016

किसानों की जमीन छिनने की साजिश चल रही है : अतुल अंजान ------ राम कृष्ण






राम कृष्ण
23-10-2016 
बेगूसराय के (विरपुर )में किसान सभा के सातवें जिला सम्मेलन में आज शामिल होने विरपुर पहुँचा ।कामरेड अतुल अंजान जी को सुनकर लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिलीं ,कामरेड अंजान ने कहा हर दो मिनट के अंदर एक किसान आत्महत्या कर रहे हैं ।पहले सामंतवाद था अब पूँजीवाद अपनी जड़ जमा रहा है ।अंजान जी ने कहा आपने अपने बेटे को b.a,m,a करवाइये ,और अपनी जमीन बचाकर रखिए, क्योंकि जब आपके बेटे को रोजगार नहीं मिले तो खेत बचा रहेगा तो वो खेती करके दाल रोटी का इंतजाम कर सकेगा।जीसने अपना खेत बेच लिया समझो उसने अपना जमीर बेच लिया ।पूंजीवाद अब आपके जमीन पर नजर गड़ाये हुए है ।किसानों की जमीन छिनने की साजिश चल रही है ।एक किसान अठारह एकड़ से ज्यादा जमीन नहीं रख सकता है ।मगर अडानी और अंबानी को पूरी छूट हैं ।महाराष्ट्र के अंदर फड़नवीस सरकार के शासन मे चार हजार से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके है ।और महाराष्ट्र के रायगढ में किसानों की पचास हजार एकड़ जमीन मुकेश अंबानी को जबरन दे दिया गया।तब किसान सभा किसानों के साथ खड़ा हुआ और भीख माँगकर बड़े बड़े वकील को केस लड़ने के लिए रखा,किसान सभा ने किसानों को संगठित करके और लंबी लड़ाई के दम पर यह केस जीता।और किसानों की जमीन अंबानी से छिनकर किसानों के बीच बाँटा गया।यह किसान सभा की बहुत बड़ी जीत है ।किसानों की जमीन बेचवाकर पूँजीवाद उसे भूमिहिन करने की साजिश कर रहा है ।झारखंड मे किसानों की जमीन जबरन एनटिपीसी लगाने के नाम पर कब्जा किया जा रहा था।जिसका विरोध किसानों ने किया तो चार नौजवान किसानों की गोली मारकर हत्या कर दी जिसमें एक नौजवान स्कूली छात्र था।इस घटना से आक्रोशित होकर हजारों लोग सड़को पर उतर गये है ।
कामरेड अतुल अंजान ने स्वामी सहजानंद सरस्वती के रास्ते संघर्ष करने की बात कही ।स्वामी सहजानंद सरस्वती की सरकारों ने कोई तरजीह नही दिया मगर आज भी किसानों के लिए रोज पूरे देश मे सैकड़ों सभाये होती है ।और बड़े आदर के साथ स्वामी जी का नाम उन सभाओं मे गुंजता हैं ।पूँजीवाद तमाम चीज़ों पर कब्जा करके अब किसानों की जमीन पर कब्जा करना चाहता हैं ।हम साठ साल से ज्यादा की उम्र के किसानों को दस हजार रूपया पेंशन देने की लड़ाई लड़ रहे हैं और ये लड़ाई तभी जिती जा सकती है जब किसान संगठित होंगे ।इस सम्मेलन में पहुँचे किसान अगर दो लाईन पर भी अगर अमल कर लिया तो हम लड़ाई को मुकाम पर पहुंचा सकते हैं ।
किसान सभा मे अतुल अंजान जी को सुनकर सुखद अनुभूति हुई और लड़ाई लड़ने की प्रेरणा मिली।
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23-10-2016 
24-10-2016 

Saturday, 22 October 2016

सीतामढ़ी में कन्हैया : हम समाज को बदलने का नारा लगाते हैं ------ राम कृष्ण




हम लेकर रहेंगे आजादी ।सीतामढी मे खेत मजदूर यूनीयन को समबोधीत करते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष साथी कन्हैया और हम । आने वाले दिनों में हम हिन्दुस्तान की सरज़मी से संघ का खात्मा कर देंगे । सीतामढ़ी में उमड़ी भीड़ यह बता रही थी कि हिन्दुस्तान को किसी भी कीमत पर संघिस्तान नहीं बनने दिया जायेगा । मिथिला से निकला यह संदेश दूर तलक जायेगा । जगत जननी सीता तो मिथिला की बेटी है और राम हमारे कुटुंब हैं । पूरी दुनिया में भले हीं राम को पूजा जाता हो लेकिन हम मिथला के लोग राम को भी गाली देते हैं । राम से हमारा खून का रिश्ता है । तुम्हारे लिए राम ईट पत्थर और गारे  में बसते हैं मेरे तो राम हृदय में बिराजमान हैं ।
रघुकुल रीत सदा चली आई,
प्राण जाई पर वचन न जाई ।


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राम कृष्ण
22-10-2016 
लौटा हूं आदि शक्ति सीता की जन्मभूमि सीतामढी से और सोचने को विवश हूं ।जब इस देश के लोगों ने सीता के चरित्र पर ऊंगली उठाया और आदिशक्ति सीता को चरित्रहीन कहकर जंगल में भेज दिया ।राम तो एक बार वनवास गये थे मगर सीता तो दोबारा वनवास गयी थी।आदिशक्ति सीता मिथिला की बेटी थी ।हम और कन्हैया मिथिला के बेटे हैं ।सीता से अग्नि परीक्षा कल भी लिया गया था और सीता के भाई से आज भी अग्नि परीक्षा लिया जा रहा है ।हम अग्नि परीक्षा देते रहें और देते रहेंगे ।और हर अग्नि परीक्षा में हम अग्नि कुंड की लपटो से पवित्र होकर निकले हैं और निकलते रहेंगे ।इतिहास मे हमारा नाम सम्मान से लिखा जाता रहा है और लिखा जाता रहेगा।कन्हैया को कहां गया की ये देशद्रोही है और कारागार में डाल दिया गया।हमारा कन्हैया उस कारागार से अग्नि कुंड में जलने की जगह और सोने की तरह चमकदार होकर निकला,फिर कहा कन्हैया सेना के खिलाफ बोलता है और वहाँ भी इन लोगों की दाल नही गली,फिर कहा कन्हैया देशद्रोही हैं, देश के खिलाफ बोलता है ।कन्हैया देश के खिलाफ नही सामप्रदायिकता के खिलाफ बोलता है ।कन्हैया गरीबों की लूट पर बोलता है ।कन्हैया शोषण पर बोलता है ।कन्हैया बीजेपी और संघ की असलियत बताता हैं ।और कन्हैया को सिर्फ बीजेपी और संघ देशद्रोही बोलती हैं ।नही तो इस देश की अस्सी फीसदी आबादी कन्हैया को अपना नायक मानती हैं ।मिथिला के बेटे या बेटियों के लिए तुम जितने भी अग्नि कुंड तैयार कर लो हर अग्नि कुंड से हम और पवित्र तेजस्वी होकर निकलेगे।मिथिला की बेटी तो रावण के यहाँ रहकर भी पवित्र ही रही, फिर कन्हैया तो मिथिला का बेटा है ।और मिथिला का बेटा तुम्हारा सर्वस्व नाश कर देगा।बीजेपी और संघियो सबसे बड़े देशद्रोही तुम हो और इस बात का प्रमाण तुम्हे मिल चुका हैं ।मैं भी मिथिला का बेटा हूं और मिथिला का हर अमन पसंद व्यक्ति तुम्हे करारा जवाब देगा।सीता तो अग्नि परीक्षा देते समय अकेली थी लेकिन कन्हैया के साथ हजारों लोग हैं ।और वो कह रहे हैं बस बहुत जुल्म सहे हैं अब सिर्फ खुरदाय करेंगे ।
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22-10-2016 

Tuesday, 18 October 2016

किसने रोक रखा है सर्वहारा क्रांति को ------ हिम्मत सिंह

ब्राह्मणवाद मुख्य रूप से गैरबराबरी और शोषण का तंत्र है :: 



Himmat Singh
16-10-2016 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को सामना :
एक सवाल जिसे बार-बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को सामना करना पड़ता है, उसे साथी मनोज सिंह ने बड़ी सटीकता से उठाया है, लेकिन यह वही बचकाना सवाल है जो पहले भी कम्युनिस्ट पार्टियाँ करती रही हैं और खुद ही जवाब भी देती रही हैं वह है जाति और धर्म का सवाल. लगभग सौ साल होने को आ गए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टियों के काम करते इस देश में, आज भी वही सनातन रूप से सवाल उठते हैं और खुद ही जवाब देते रहते हैं. इसी सन्दर्भ में कामरेड मनोज जी का कथन बिना किसी रुकावट के यहाँ दे रहा हूँ और उसपर मेरी टिपण्णी भी.
कॉमरेड मनोज सिंह कहिन:: 
पहले धर्म-जाति का सवाल या सर्वहारा क्रान्ति कि?
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बदलाव निश्चित है, बस सर्वहारा वर्ग को इस बदलाव की दशा और दिशा तय करना है, साथ ही इसकी गति को तेज़ करने की ज़रुरत है। यह सत्य है कि सर्वहारा क्रान्ति के राह में ऐसे कई सवाल है जिसपर ध्यान देने की ज़रुरत है। इसका मतलब ये नहीं की वर्गीय चेतना की राह को धीमां कर पहले धर्म या जाति के सवाल को हल किया जाए। मेरी नज़र में सही रास्ता सिर्फ ये है कि सर्वहारा के आर्थिक बराबरी और स्वतन्त्रता के बाद ही ब्राह्मणवाद, सामन्तवाद, साम्प्रदायिकता और पूंजीवाद से छुटकारा संभव होगा। हां धर्म और जाति के सवाल को ज़रूर इस बड़ी लड़ाई में शामिल कर उसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ना ही होगा, पर बड़ा सवाल तो सर्वहारा के सत्ता स्थापना के बाद ही हल होगा। तभी समतामूलक, जातिविहीन और आर्थिक समाज की स्थापना संभव है।
मेरी यानी कि (Himmat Singh) की टिप्पणी :
मनोज भाई, वही रटी-रटाई बात दुहरा रहे हैं, आखिर किसने रोक रखा है सर्वहारा क्रांति को. बहुत ही बचकाना सवाल है. जब हम कहते हैं कि भारतीय समाज का सारा का सारा तंत्र विकसित ही हुआ है इसी तरह से, जिसे हम जातीय व्यवस्था या यूं कहें ब्राह्मणवादी तंत्र कहते हैं. और यह ब्राह्मणवाद मुख्य रूप से गैरबराबरी और शोषण का तंत्र है. उसमे कोढ़ में खाज यह कि यहाँ जो पूँजीवाद विकसित हुआ है, वह भी वर्णाश्रमी ब्राह्मणवाद के तहत ही विकसित हुआ है इसे प्रचलित भाषा में हिन्दू पूँजीवाद कह सकते हैं. इस व्यवस्था को नए सिरे से खाद-पानी और मजबूती प्रदान किया अंग्रेजों ने, उन्हेंने यहाँ आकर देखा कि ब्राह्मणवादियों ने शोषण को शास्वत संरचना प्रदान कर रखी है. बन्दोस्बस्ती कानून (Settlement Act) के जरिये अकारण ही नहीं इन सवर्ण ब्राह्मणवादियों के हाथों में संसाधनों का हस्तांतरण तथा शूद्रों आदिवासियों और मुसलमानों को तत्कालीन ब्रिटिश पूँजीवाद के सस्ता मैन्युअल लेबर में तब्दील कर दिया गया. इंडियन फारेस्ट एक्ट १८६५ के जरिये आदिवासियों को जंगल से बेदखल करना. मैकाले एजुकेशन सिस्टम के जरिये मुसलमानों को शिक्षा से लगभग बाहर धकेलना, संस्कृति के नाम पर शंकराचार्य के नए ब्राह्मणवाद को स्थापित करना. पूरी समग्रता में देखे बगैर चीजों को अलग-थलग रूप में देखने पर व्यापक बदलाव या उत्पीडित जन के मुक्ति के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है.
https://www.facebook.com/hmtsinghdelhi/posts/10208998756598467




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( मैंने समय समय पर कई कई बार यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि, 'नास्तिकवाद ' : 'एथीज़्म ' की थोथी  ज़िद्द के चलते 'धर्म ' को 'मजहबों ' के समकक्ष रख कर शहीद भगत सिंह व महर्षि कार्ल मार्क्स की आड़ में ठुकरा दिया जाता है जो वस्तुतः एक गंभीर 'ब्राह्मण वादी चाल ' है। 
यदि हम धर्म का मर्म समझ कर जनता को समझाएँ तो जनता फासिस्ट शक्तियों के अधर्म को धर्म मानने की गलती न करे और तब हम जनता को समझा सकते हैं कि, जन्मगत जाति व्यवस्था प्राकृतिक नियमों के प्रतिकूल और शोषण पर आधारित है। वेदों में कर्मगत आधार पर वर्णाश्रम व्यवस्था थी जो कर्म के आधार पर थी न कि, जन्म के आधार पर। लेकिन ब्राह्मण वाद की चाल को न समझते हुये ख़्वामख़्वाह की ज़िद्द के चलते धर्म को ठुकराने का ठोस लाभ सांप्रदायिक/फासिस्ट शक्तियों को मिल रहा है )
------ विजय राजबली माथुर 
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18-10-2016